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सर्व सेवा संगठन पुरस्कार वितरण समारोह

#कलांगन (पेंटिंग, निबंध एवं कविता प्रतियोगिता) के #पुरस्कार_वितरण_समारोह का आयोजन विश्नोई आश्रम, भीमगोडा हरिद्वार में सफल रुप से संपन्न हुआ जिसमें सैकड़ों बच्चों एवं अभिभ...

रिश्ता गरीबी का

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हा मै मोहताज हू उस गरीबी             जिससे निकला हू कैसे भुल जाउ बातो को       जिससे गुजरा हू खुद मैं ................. .............. हा आज अच्छा हू  मैं  पर_उन_अमीरो_को_आज_भी_कुछ_कम_लगता_है पर_उन_से_सिर्फ_इतना_ही_कहूगा            तुमारी_अमीरी_तुम_को_मुबारख             मुझे_मेरी_गरीबी .......................... सुमित सिंह9719368950

स्पर्श गंगा स्वछता अभियान

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स्पर्श गंगा अभियान आज 6 जनवरी को प्रत्येक रविवार की भांति स्पर्श गंगा अभ्यान उतरी प्रभारी सलोनी गौड के नेतृत्व में महिलाओं ने घाटों पर सफाई की एवं लोगों को मां गंगा के प्रति स्वच्छ रखने के लिए जागरूक किया आज के प्रोग्राम में कुछ युवा भी सम्मिलित हुए ,  आदरणीय निशंक जी द्वारा चलाए गए स्पर्श गंगा अभ्यान एवं श्री आरूषी पोखरियाल  जी द्वारा चलाए गए इस अभियान का आज एक क्रांति का रूप ले लिया है नमो-नमो निशंक जी जय गंगे मैया उपस्थित गण मनोज गौड , सुमित सिंह , वासु ठाकुर , आयुष जी  एवं समस्त महिला टीम एवं युवा टीम  अभियान चलाया गया सर्वानंद घाट स्वामी नारायण घाट प्रकाश विधि घाट शिव की पौड़ी ब्रह्मचारी घाट एवं विभिन्न घाटों पर अभियान चलाया     

Dosti

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दोस्ती जन्नतो से प्यारी प्यारी दोस्ती ख्वाबो से सजी दोस्ती तमना सी न्यारी दोस्ती ....... फिर मिल जाये दोस्ती दोस्ती की कदर है मुझको दोस्ती की इबादत है मुझको दोस्ती की खायीश है मुझको ......फिर मिल जाये दोस्ती बचपन की यादे साथ दोस्ती का वो अफसाना साथ मिलकर स्कूल जाना गजब की वो यारी ........फिर मिल जाये दोस्ती सासो से पली वो बाते दिल से जोडी वो दोस्ती अमृत से कम नही वो साथ बस सफर मिल जाये फिर वही......    सुमित सिंह 9719368950

हे प्यारे भगवान

   हे प्यारे भगवान  ऐहसास तेरे होने का ऐहसास इस जिन्दगी का ऐहसास इन कल्पनाओ का ऐहसास मेरे उस ध्यान का हे प्यारे भगवान....... तेरे दर्शन परम शून्य है तेरे दर्शन कल्पना शून्य हैं तेरे दर्शन भक्ती स्वरूप है ते दर्शन अल्प काल है ते दर्शन ही मुल जीवन है, हे प्यारे भगवान...... तुझे महसूस किया है मेने तुझे अपने समीप पाया है मेने तुझे अपनी कल्पनाओ मे देखा है मेने तुझे अपने ऐहसास से समझा है मेने तुझे अपने मन से महसूस किया है मेने, हे प्यारे भगवान..... गीता मे तेरा रसधान वर्णन पूर्णाणो मे तेरा अमृत पान रामयण मे तेर करूण दर्शन, हे मेरे प्यारे भगवान...... दुनिया रहस्यमयी बन्धनो में बन्धनो में बन्धी प्रेम मोह में मोह से अपनो के आकर्षण में आकर्षण अल्प धन सुख में सुख मे ईश्वर को भुल गये, हे प्यारे भगवान...... अपना जन्म मोह मुक्त था मुक्त संसार से प्रम हो गया प्रेम मे ईश्वर कल्पना हीन हो गये हीन हो गये अपनी शक्ती से शक्ती जो जन्मो से मिली थी, हे प्यारे भगवान......   सुमित सिंह 9719368950

Halka pyar ho gya

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हल्का प्यार हो गया इन्तजार के उस लम्हे मैं इन्तजार के उस आलम मैं इन्तजार के उस आशियाने मैं, बस हल्का प्यार हो गया ! ना जाने कितना इन्तजार किया हमने ना जाने कितना आशू बाहाये हमने ना जाने कितने रूढ गये हमसे ना जाने कितने भूल गये हमें, बस हल्का प्यार हो गया! बे गुलाम हो गये हम बे इन्तहा हो गये हम बे वक्त हो गये हम बे आलम हो गये हम, हल्का प्यार हो गया ! जनतो से गुजारी है हमारी जनतो से अल्पास है हमारी जनतो से खायीश है हमारी जनतो से तमना है हमारी, बस हल्का प्यार हो गया! .......... पर यादे अपसाने की वही होती हैं जिनसे हल्का प्यार होता हैं सुमित सिंह 9719368950

Pyari maa

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प्यारी मां बैर हो गयी मां मुझसे रूठ गयी मां मुझसे दूर हो गयी मां मुझसे ओ प्यारी मां मुझसे हो गयी बड़ी भूल क्षमा कर दो मुझको अपने प्यारे स्नेह से ओ प्यारी मां खेद है मुझे अपने क्रोध का दुख है मुझे इस क्रोध का इस क्रोध को क्या व्यंग कहू उस छाया मे क्या बोल कहू ओ प्यारी मां तुमारे स्पर्श से ही मुझे अपने होने का अहसास होता है आपकी वो प्यारी बोली अपसाना बनकर छू जाती है ओ प्यारी मां बैर हो गयी मां मुझसे संसार रूठ गया मुझसे मेरा जीवन विफल हो गया मेरा जीवन लक्ष्य हीन हो गया ओ प्यारी मां सुबह से श्याम हो गयी धरती आकाश एक हो गया सूर्य अस्त हो गया आसमान में तारे खिल गये पर अभी भी वो नाराजी ओ प्यारी मां समझ ना पाया रस प्याली को समझ ना पाया उस धारा को समझ ना पाया उस प्यार को प्रेम तुमारा सदा अमृत जैसा ओ प्यारी मां सुमित सिंह 9719368950