Halka pyar ho gya

हल्का प्यार हो गया
इन्तजार के उस लम्हे मैं
इन्तजार के उस आलम मैं
इन्तजार के उस आशियाने मैं,
बस हल्का प्यार हो गया !
ना जाने कितना इन्तजार किया हमने
ना जाने कितना आशू बाहाये हमने
ना जाने कितने रूढ गये हमसे
ना जाने कितने भूल गये हमें,
बस हल्का प्यार हो गया!
बे गुलाम हो गये हम
बे इन्तहा हो गये हम
बे वक्त हो गये हम
बे आलम हो गये हम,
हल्का प्यार हो गया !
जनतो से गुजारी है हमारी
जनतो से अल्पास है हमारी
जनतो से खायीश है हमारी
जनतो से तमना है हमारी,
बस हल्का प्यार हो गया!
..........
पर यादे अपसाने की वही होती हैं जिनसे हल्का प्यार होता हैं
सुमित सिंह 9719368950

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