अपनी पहचान अपने प्रथमिक विद्यालय

मेरी कहानी- 
मेरे घर के पास बहुत सारे प्रथमिक विद्यालय हैं मैंने विद्यालय में प्रवेश किया । जिसमें मैंने उनकी स्थिति का जायजा लिया , जिसने मुझे यह पता चला कि आज कल लोग सरकारी स्कूल में क्यों नहीं पड़ रहे है यहां बच्चों को क्यों नहीं पढ़ा रहे हैं सभी सभी प्राइमरी स्कूलों की हालत बहुत खराब है....
सामाजिक संगठनों द्वारा इनको सही करने की कोशिश भी की जा रही है जिसमें उनको बैठने के लिए बेंच ,टेबल ,शौचालय का निर्माण आदि किया जा रहा है  चलो एक नारा देते हैं "अपनी पहचान अपने प्रथमिक विद्यालय" चलो स्कूल चले

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